Friday, February 27, 2015

डिस्टेंस रेलिशनशिप 67



बिटिया की मुंबई में जॉब लग गयी है। आप बताये भाई साहब आपकी बहु को नौकरी करने दे या मना कर दे…
नेहा के बाबूजी ने उसके होने वाले ससुर जी से पूछा
 जवाब था ये भी कोई पूछने की बात है आजकल नौकरी मिलती कहा है....... अरे  नौकरी करने दे। …अच्छा दोनों रिश्ता और स्पेस दोनों मिल जायेगा। ……आजकल तो जमाना ही डिस्टेंस रेलिशनशिप का है। ……………नेह की सास और  बेटे को भी कोई दिक्कत नही है नेहा से डिस्टेंस रेलिशनशिप रखने 

Wednesday, February 25, 2015

धर्मांतरण 65
पागल हैं इससे दूर रहो। …………। शोर की आवाज़ बेचारी को भंडारे की में घुसने से भी डरा दिया
भूख से बेहाल मन्जिद तक जा पहुंची। पागल हैं.पागल हैं.पागल हैं
एक बार फिर निराशा हो लोट गयी
दूसरे धर्म के ठेकेदारो ने भी बेचारी को भूखा लौटा दिया। ....
 बेचारी अपनी बदकिस्मती पे रोती पानी पी कर सोच रही थी की कल किस धर्माधिकारी के पास जाया जाये जो ये समझे की मानवता नाम की भी कोई चीज होती है जो ये समझे की भूख किसी को पागल कर देती हैं 

Tuesday, February 24, 2015

त्रिकोरीय प्रेम 6 4

मैं आपके बिना नहीं रह सकती हू -रीमा
जी तो मैं भी नही सकता तुम्हारे बिना। ………। क्या करू माँ हमारे रिश्ते को कभी हा नही करेगी -मोहन
 क्या कमी है मुझमे ---------रीमा
जानता हू अच्छी मुझे कोई नही मिलेगी. जितना प्यार तुमने किया कोई नही करेगा। । कोई कमी नही है तुमसे जिससे शादी करोगी बहुत नसीब वाला होगा ---मोहन
फिर क्यों छोड़ रहे हमे अकेले जीने को दुनिआ के लिए....... फिर कुछ सोच कर जाओ मैं कभी नहीं  परिवार से उसका बेटा छीने---रीमा रोते हुए  जानती हू अपनी कमी
ऐसा मत बोलो हमारी जाति एक नहीं सिर्फ कहने को जमाना बदला हैं। …शादी मैं माँ की मर्जी से समाज कोदिखाने को कर लगा  और की होगी हम कभी न मिले कभी पर प्यार तो नही मर सकता और माँ हमारे दर्द को भी समझेगी ना दुनिआ त्रिकोरीय प्रेम  मान देगी -। …--मोहन
सच कहा और जमाना एक बार फिर इस जाति के न मिलने बनाए त्रिकोरीय प्रेम नही समझ पायेगा -रीमा
साधना श्रीवास्तव

Monday, February 23, 2015

इंटरनेट का नशा 63

आज फिर देर हो गयी थी क्या करे सुबह 4 बजे तक तो लैपटॉप में बिटिया कुछ कर रही थी.
माँ ने सोचा कुछ कहना ही बेकार है ओह क्या सोचा समझा था कि बेटी बेटे में फर्क नही करेगी। बेटे को कंप्यूटर क्लास जॉइन करायी तो बेटी भी को अपनी जिद से लैपटॉप दिला  दिया  . अब उनकी सुनता कौन था बेटा घर से बाहर रहता और बिटिया ने घर में ही लैपटॉप को अपनी दुनिआ बना लिया था अकेले ही रसोई में कुछ बना रही थी.
पिता जी ने गुस्से में इंटरनेट और लैपटॉप बनाने वालो पर कटु शब्द बोल कर मन शांत कर लिया था
भाई ने बहना को उपदेश दे डाला इंटरनेट का नशा ठीक नहीं है। …………………………………।
दरवाजे की घंटी बजती हैं। ……
कुरियर वाला गिफ्ट और फूल लेकर दरवाजे पर खड़ा था बेटी ने माँ को गिफ्ट देते हुए कहा जनदिन मुबारक

सारे घरवाले भूल गए थे कि आज माँ का जन्मदिन है. बिटिया देर रात तक माँ के लिए गिफ्ट खोज रही थीं। उसने   ही फेसबुक पर देखा था की लोग रिश्तो से दूर जा रहे और इंटरनेट के  नशे के आदि हो रहे तब ही उसने सोच लिया इंटरनेट का नशा से रिश्तो की दवा कर ली जाये। … ताकि लोग ये जान ले की कोई भी चीज सिर्फ तरीका और इस्तेमाल से अच्छी बुरी बनती है। .... साधना श्रीवास्तव वाराणसी

Thursday, December 11, 2014

Dohari mansikata ki Sikar larkiya


आज मैंने अपने ब्लॉग का नाम सोचा। ……लेखन सिर्फ शौक़ नहीं दुनिया से खुद को जाने का जरिया है… मेरी पूजा मेरी साधना है…। 

Wednesday, December 10, 2014