Tuesday, July 7, 2020

Short story - life

जिन्दगी
संदीप एक लड़की शिवानी से प्यार करता था। शिवानी का सपना डाक्टर बनना था। अपनी मेहनत के बल पर उसका एडमीशन भी मेडिकल कालेज में हो गया। हम बहुत खुश थे। वह मध्यमवर्गीय परिवार की सीधी-साधी लड़की थी। शिवानी ने कहा था जब वह डॉक्टर बन जायेगी तब संदीप से शादी करेगी। उसका एडमीशिन भी हो गया। मेडिकल कालेज में रैगिंग के नाम पर कुछ अजीबों-गरीब हरकतों  सवालों का जवाब  दे पायी। वह बेचारी उस महौल में खुद असहज महसूस करने लगी। रैगिंग से बचने को उसने आत्महत्या कर ली। संदीप उसकी मौत सह नहीं पाया। सदमे से गुमसुम हो गया। बार-बार लगता काश मैं शिवानी को बचा पाता। काश शिवानी जैसी होनहार लड़की को खुदकुशी  करनी पड़ती। उसके बिना एक दिन भी जीना मुश्किल था। मेरी हालत पागलों सी हो गयी। तब संदीप की मॉ ने संदीप को रास्ता दिखायाहौसला बढ़ाया।
संदीप की मां ने कहा-जानती हैं आत्महत्या करने वाला यह भूल जाता है कि अपने चाहने वालों को कितना दुख होता है। तिल-तिल कर मरने को मजबूर हो जाता है। शिवानी की खुदकुशी ने मुझे तो तोड़ा ही साथ ही दुनियावालों को लगा कि उसका चरित्र ठीक नहीं। उसकी छोटी शुभांगी से शादी को कोई लड़का तैयार  होगा। तब मॉ जी ने शुभांगी के पापा को मनाया। संदीप और शुभांगी की शादी हो गयी। शिवानी की कमी तो कभी पूरी नहीं हो सकती है। पंरतु उसकी बहन का घर बसाकर संदीप बहुत तसल्ली हुयी। सच हारने में नहीं जिन्दगी का मजा और सुख तो दूसरों के सपने पूरे करने में है।
डॉ. साधना श्रीवास्तव

Short play - ye hmari life hai


यह हमारी लाइफ है
                  यह हमारी लाइफ है

जैसे-जैसे ट्रेन कानपुर स्टेशन छोड़ रही थी, वैसे-वैसे सपना को मंजिल करीब नजर आ रही थी। उसकी आँखों मंे हजारों सपने एक बार फिर झिलमिला उठे।
सपना ने इंटर की परीक्षा पास की हैं। यू0पी0 बोर्ड से उसने जिला टाॅप किया था। आंखों में हजारों सपने लिये सपना ने शहर के सबसे बड़े कालेज में कृषि विज्ञान से स्नातक के लिए एप्लाई किया था।
दृश्य-1
 सपना जब हास्टल पहुची तो उसकी  रूममेट महक ने उसका स्वागत किया।
महक ने सपना स्वागत है तुम्हारा इस नयी जिन्दगी में
सपना- स्वागत का बहुत धन्यवाद महक
आचनक हास्टल के एक रूम से बहुत लड़कियों के बात करने की और हल्के म्यूजिक के शोर की आवाज आने लगी और उन्हीं आवाज के बीच एक महिला की तेज आवाज में डाॅटने की आवाज आयी जो कि  हाउस कीपर की सख्त आवाज थी।
हाउस कीपर-’’इतना शोर क्यों हो रहा यहाँ से तुम लड़कियों शांन्ति से नहीं सकती।
चलो नीचे चलो वार्डन मैम आॅफिस में बुला रही है आज से आपकी नयी वार्डन ज्वाइन किया है?’’
अचानक बिल्कुल शांति का माहौल.............
फिर एक स्वर में लड़कियों की आवाज
यह मैम हम लोग आते है, आप चलिए।
सपना भी महक के साथ वार्डन के रूम की ओर गयी।
रास्ते में फिर लड़कियों के कानाफूसी की आवाज...................
’’यार आज तो ज्यादा हल्ला हो गया’’
हो यार, कही मैम घर फोन न कर दें’’
’’क्या करेंगी कुछ नहीं’’
’’हाँ’’ और ’’नहीं’’ तो क्या ये हमारी लाइफ है.............
शंाति से डाॅट सुन लेगे...........और फिर वापस जिदंगी शुरू’’
’’चलो पहले नयी वार्डन से मिले तो...................
लड़कियाँ जब वार्डन रूम में पहुॅची तो उन्होनें वहाॅ पुरानी मैडम ही बैठी थी।
-’’ कहाँ है मैम आॅफिस में तो सिर्फ पुरानी वाडेन में बैठी है,
महक ने  खिड़की से देखा’’
हाउस कीपर मुस्कुराते हुए ’’अरे अपने पीछे देखो जहाँ लड़कियों खड़ी आपस में कानफूसी कर रही थी वही सीढ़ी के पास तो नयी मैम खड़ी थी।
लडकियों की आवाज-’’गुड मार्निग मैम’’
’’ -’’साॅरी मैम’’
’’ -’’मैम आप तो बहुत यंग हो’’
’’ -’’हाँ हमें तो बहुत नयी लड़की होगी’’
’’ -’’मैम आप नाराज मत होना।’’
वार्डन मैम की आवाज-हँसते हुए-’’ थैक्स - थैक्स कोई बात नहीं तुम कैसे पहचानती यह तो मेरी उम्र कम है जो तुम सब में मिल गयी। यह मेरी पहली जाॅब है हम भी अपना घर छोड़कर इतनी दूर आये है, तुम सबके लिए।
चलो तुम सब वाडेन रूम में आओं........
सबके एक साथ चलने की आवाज...........
दृश्य-2
तो यह आपकी नयी वार्डन है, खैर मैं तो आज से जा रही हूँ और नये  वर्ष की ढेरों शुभकामनाएँ ये है..........ये है..............(नाम भूलने की अदा)
बाल पकड़ते हुये नयी वार्डन..............
मैं हूँ मिस रीना.........आज ही ज्वाइन किय हमारी मुलाकात तो बाहर हो चुकी है।
’’जी मैम’’-लड़कियों का एक स्वर में जवाब।
वार्डन-’’ तो ध्यान से सुनो यह भी आप लोगों का एक घर है। इसे साफ रखना, आपस में प्यार से रहना और नियमों का पालन करना। लड़कियों हम एक  परिवार है सब अपने घरों से दूर रहते है।
लड़कियाँ-’’जी मैम हम आपको शिकायत का मौका नहीं देंगे।
वार्डन-’’ यह हाॅस्टल शहर से दूर है तो इस शहर से दूर है तो इस बात का विशेष ध्यान रखना कि शाम 7 बजे तक सारी लड़कियाँ हाॅस्टल वापस आ जाये। देर तक बाहर ना रहे...................बिना सूचना, एटलीकेशन दिये बाहर ना जाये।
दिवारों और हास्टल की सफाई का ध्यान रखे। अब आप सब जाइये आपको कोई शिकायत या परेशानी हो तो शिकायत पटी में लिख कर डाल दे। आपकी शिकायत पर तुरंत कार्यवाही होगी। मेरा फोन नं0 नोटिस बोर्ड पर है आप कभी भी किसी भी समय फोन कर सकती है और हाँ एक बात जरूर ध्यान रखियेगा सभी लड़कियाँ अनुशासन का विशेष ध्यान रखेंगी।
लड़कियों के स्वर में-’’थैक्यू मैम, हैव ए नाइस डे हम चलते है।
हाउसकीपर की आवाज--’’वार्डन मैम आप जरा बचके रहियेगा।
वार्डन मैम ’’हँसते हुये’’- सब बच्चे है आप चिन्ता न करें। अग मुझे इतना अपना घर याद आता तो यह तो मासूम है कोई अपराधी नहीं।’’
दृश्य-3
जल्दी ही वह दोनों अच्छी सहेली बन गयी । दोनो विपरित स्वभाव के होने के बाद भी एक दूसरे की हमदर्द थी ।

सपना-’’यार तुम तो मुझे छमू लमंत पार्टी घूमाने वाली थी।..........अब क्या?
महक-’’अब क्या अब भी चलेगे, तुम बस तैयार रहना।
सपना-’’पर कैसे पार्टी तो रात को होती है और हम सात के बाद बाहर नहीं रह सकते’’
महक यार तुम लोग तो बेकार में चिन्ता कर रही हो मैम डाटेगी और वापस फिर से अपनी जिन्दगी फिर से अपनी जिन्दगी शुरू.......ये हमारी लाइफ है।
सपना-’’यार तुम जो जानती हो इतनी देर बाहर रहने का नियम नहीं है।
महक- यह नियम कायदे नाटिस बोर्ड पर चिपकने को होते है हमारे लिए नहीं’
सपना-क्या कह रही हो, हम कैसे मैनेज करेंगे?
महक-’’ हम है तो क्या गम है? हम तो इस हाॅस्टल के अन्दर होली खेल चुके है, मेरा कोई काम रूकता नहीं...........तुम्हें डर लग रहा तो सोच लो मेरा तो हर पार्टी अटैंड करने का प्रण है और मैं कँरूगी।’’
सपना-’’ पर कैसे?’’
महक-’’ वह मुझ पर छोड़ दो, बस तुम बताओं तुम्हें चलना है या नहीं’’?
सपना-’’ हाॅ लेकिन कैसे?’’
महक-’’ वह तुम मुझ पर छोड़ दो। हम सुबह-सुबह ही हास्टल में एपलीकेशन देकर चले जायेगे और फिर पूरा दिन अपना, यह हमारी लाइफ है। दिनभर मस्ती करेंगे। मेरे ब्यायफ्रेन्ड आकाश ने सब प्लान कर लिय है वह अपने दोस्तों को छमू लमंत पार्टी दे रहा और मैं उसमें शामिल न हूँ यह हो नहीं सकता।
सपना-’’मै तो पहली बार किसी ऐसी पार्टी में जाऊँगी जहाँ लड़के होगे?
महक-’’लाइफ में हर काम पहली बार होता है। लाइफ मोबाइल बिना और पार्टी लड़कों बिना सूनी होती है मेरा नाम है महक और मैं अपनी लाइफ किसी बंधन में नहीं जी सकती।
सपना हँसते हुए हाँ यह हमारी लाइफ जो है।
दृश्य-4
-’’हैलों आकाश की आवाज
-’’हैलो -महक
-’’यार एक प्राब्लम है, देर रात तक पार्टी की परमिशन नहीं, ध्वनी प्रदूषण वालों ने वैन लगाया है, तुम्हें रात हाॅस्टन लौटना होगा।’’
महक-’’क्या यार ये प्रदूषण वाले क्या जिदंगी। में नरक करते पूरी पार्टी का मजा खराब करते। रात में हास्टल कैसे जाऊँगी। सपना भी होगी, नयी वार्डन भी आयी है। इसमें तो अच्छा हम न आये।’’
आकाश-’’नहीं-नहीं तुम्हें आना होगा तुम्हारे बिना कैसा छमू लमंतघ् मैं तुम्हें अपनी कार से वापस हास्टल छोड़ दूगां’’ तो हम मैनेज कर सकते हैं।’’
आकाश-’’यह हुयी न बात-----

दृश्य-5
दृश्य-डिस्क
कलाकार- भीड़ ,, डिस्क का शाॅट

पार्टी अपने पूरे रंग में थी हल्का गाना, मस्ती डांस का महौल।
महौल के बीच महक डिस्क बार में थिरक है। झूम रही है।
बैकग्राउड से गानों की आवाज.......................
महक- ’’कैसी लगी पार्टी’’
सपना- ’’बहुत अच्छी, बहुत मजा आया।
अचानक टेबुल की ओर इशारा करती, बिन्दास महौल थिरकते कदम, हल्की इस्माइल, खुशदिल महौल में अकाश को आवाज देती।
महक- आकाश , आकाश
टेबुल से आकाश - ‘‘या महक’’
महक- ‘‘आ ना डांस करते है’’।
आकाश - नही यार मैं थक गया हूॅ।
महक- क्या थक गये इतने जल्दी आ ना कितना मजा आ रहा, आ ना
आकाश के पास खीचतीं सी..............
आकाश भी उठ कर आ जाता है।
दोनों डांस करते है...................
अकाश- वाॅव महक तू कितना अच्छा डांस करती।
महक- ‘‘अच्छा-वच्छा का पता नही, बस आई लव यू डांस’’ बचपन से किसी से यह कह पायी ना कभी खुल कर यह आजादी।
महक- ‘‘बस आज की रात दे दो कुुछ पल दे दो, कल से तो मैं गाॅव जा रही, फिर पता नही कब मुलाकात हो?
आकाश - ‘‘रोज-रोज’’
आकाश महक को टेबुल के पास ले जाता, आंखें बन्द करों।
महक- ‘‘क्या है, बताओं ना?
आकाश प्लीज आॅखें बन्द करों ना , प्लीज।
महक आॅखें बन्द करती है।
अर्पित अब हाथ आगे करों।
महक हाथ आगे करती है।
आकाश उसके हाथ में दो मोबाइल रखता है।
महक- आॅख खोलती- ‘मोबाइल’?
संदीप - आॅख के इशारे से हां करता है, फिर प्यार से महक का हाथ पकड़ कर कहता- ‘बाबू, मैं भी तुम्हारे बिना जी नही सकता, तुम मेरी आदत जरूरत, चाहत बन गयी हो, मैं जानता हूॅ कल से हम अलग हो रहे, कालेज, पढ़ायी, मस्ती, सब खत्म..............बस होगी तो यादें।
महक- ‘‘तब ही तो मै। आज और पल तुम्हारे साथ जीना चाहती। थैंक्स।
संदीप - किस बात का?
‘‘मोबाइल का’’ महक
‘‘तो तुझेे क्या लगता है कि मैं जी सकता तुम्हारे बिना रह सकता बिना बात किये रह सकता, अच्छा सुन यह देख मैं सारे फंक्शन समझा देता तुम्हें’’
महक- हॅू।
देख यह कैमरा है, यह रेडियों, गाने और रात 12 से सुबह 6 तक फ्री रहेगा।
महक- अच्छा।
आकाश - अच्छा तुम ठीक से बैठों, तुम्हारी एक फोटो लेनी है।
महक- अच्छा रिकार्डिंग भी’
आकाश - हाॅ
महक खुशी से बच्चों की तरह उदलते हुए डांस फ्लोर की ओर- ‘‘प्लीज मेरे डांस की रिकार्डिंग कैसी लगती हॅू’’।
आकाश - अरे हो।
और महक के डांस को रिकार्ड करने लगता।
महक और मस्ती से डांस कर रही, खिला-खिला। गुनगुना रही।
आकाश अचानक बेटर को आवाज देता- ‘बेटर’
आकाश यह फोन पकड़ और हमारे डांस की रिकार्डिंग कर’ मोबाइल वेटर को देते हुए स्टेज की ओर भागता है’’।
वेटर मुस्कुराता हुआ रिकार्डिंग करने लगता है।
थोड़ी देर बाद दोनों टेबल पर आकर बैठते है।
आकाश - आज का दिन बहुत खास है।
महक- मेरे लिए भी कल से ना जाने कैसे रहूंगी।
आकाश - चिंता न कर पागल मैं जल्दी कोई अच्छी नौकरी खोज लूंगा, फिर आऊंगा। ना तेरे बाबा से हाथ मागनंे।
महक- ‘‘सच्ची मुझे भूल तो ना जाओगें।
आकाश उसके होंठों पर अंगुली रखकर...........मरते दम तक नही।
महक- जानती हूं कि तुम मेरा हर महक पूरा करोंगे मेरा साथ कभी मत छोड़ना।
आकाश - कभी नही।
महक के हाथांे पर हाथ रखकर।
‘‘अब चल बहुत देर हो रही । अकाश
अचानक महक टेबुल पर रखे गिलास को झटके से दी जाती।
आकाश - यह क्या यार टाªई करने के ठीक, यह एक साथ पूरा गिलास नही.....................
महक- हल्के नशे में.....
पहले तो लत लगाते, फिर दूर जाने की बात करते, मुझ गवार को छोड़ेगे नही।
आकाश - पागल तुझे चढ़ गयी है, चल घर चल। ठीक है हम बड़े शहर मंे रहते, पर पले-बढ़े तो गाॅव की मिट्टी में हैं। अब घर चल।
महक टेबुल पर रखपे मोबाइल को पर्स में रखते हुए आकाश का सहारा लेते हुए बाहर जाती है।
वेटर जाते-जाते पीछे से साहब-टिप। यह आपका मोबाइल हा यार जल्दी-जल्दी में भूल गया।
आकाश जब से उसे पैसे निकाल कर दे देता, अचानक उसके जेब से कुछ पर्चा गिरता जिसे वह बिना देखे निकल जाता।

दृश्य-6
बाकी सब तो अपने घर चले जाते है। सपना भी हाॅस्टल को निकल जाती है लेकिन महक ने जोश में इतनी पी ली कि अपने होश खो बैठी । आकाश महक को अपने साथ ले जाता है।
सड़क पर बाइक दौड़ती............
आगे आकाश पीछे नशें में महक............
महक- थैंक्स आज मैंने भी तुम्हारी वजह से एक शहरी लड़की की जिन्दगी जी।
आकाश - थैंक्स मत बोल तेरा महक पूरा करना मुझे भी अच्छा लगता............... काश मैं तुम्हारे हर अरमान पूरे कर सकूं।
महक- अरे प्लीज आज हास्टल नही।
आकाश - क्योें?
महक- मैं इस हालात, कपड़ों में हास्टल गयी तो वार्डेंन मैंम मार डालेगी।
अकाश- फिर कहां।
महक- कही भी, बस हास्टल नही........आज मैंने बोल दिया है कि रात मैं एक दोस्त रहूंगी।
अकाश- बे ऐसा क्यांे।
महक- आज की रात मैं तुम्हारे साथ रहना चाहती। हर पल.तुमने भी कल कहा था।
अर्पित- लेकिन मैं अब तुझे लेकर कहां जाऊं, भावनाओं में बहककर कह दिया।
महक- लेकिन मैंने तो तुम्हारी ख्वाहिश को पूरा करने ऐसा किया।
अकाश- लेकिन मैं इतनी रात तुझे कहां ले जाउ।
महक- कही भी लेकिन हास्टल नही अच्छा चलों अपने रूम ले चलों।
अकाश- आर यू श्योंर  पक्का।
महक- नशें में झूमती पक्का।
दृश्य-7
कमरे का लाक टटोलते हुए अकाश अन्दर आता, पीछे-पीछे महक
बेड के बगल में महक की फोटो फ्रेम में
महक- ‘‘मेरी फोटो‘‘
अकाश- हाँ तुम्हें देखे, सोचे बिना नींद ही कहाँ आती
महक- सच
अचानक रूम का बिखरा सामान देख ठीक करती, लड़खड़ाते
कदमो से..........
अकाश- उसकी रिकाार्डिग फिर करने लगता?
महक- यह क्या?
अकाश- मेरे कमरे में कुछ हसीन यादों को इस मोबाइल
में कैद करना चाहता......
महक- मुस्कुराने लगती........ हसी की आवाज
अकाश- अचानक मोबाइल आॅन करके साइड टेबुल पर रख
देता, और धीरे से महक के करीब आता
‘‘जान हमेशा यूॅ ही मुस्कुराना‘‘
महक- ‘‘तुम भी ऐसे ही हमेशा साथ देना
दोनो की नजदीकियाॅ बढ़ती है।
गाना बज रहा।
आचनक आकाश बोला - ’’मजा तो तुम लोगों के रहने से रहा वरना यह पार्टी, मस्ती सब बेकार....................अच्छा यह बताओं हाॅस्टल में क्या बोला?
’’अरे तेरी भूल गयी...........महक
क्या करती हो मैम को फोन लगाओं...............
महक ’’आकाश म्यूजिक बंद कर दो मिनट को’’
ट्रिन,ट्रिन......................(खामोशी में मोबाइल की रिंग...............)
हैलो................वार्डन की आवाज
’’ मैम हम जाम में फँस गये है, आने में देर होगी।’’ महक
’’ बेटा तुम्हें समय से आना चाहिए था जानती हो ताकि हास्टल का रास्ता कितना सुनसान है। अच्छा होता अगर आप लोग वही अपनी आंटी के यहाँ रूक जाते।
’’नहीं हम रास्ते में है आप परेशान मत हो हम गाड़ी से है ...................साॅरी मैम आगे से हम ऐसा नहीं करेंगे।’’
वार्डन मैम परेशान होतु हुए-’’ तुम सब समझते नहीं तुम्हें कुछ हो गया तो हम तुम्हारे माता-पिता को क्या जवाब देंगे। हम जाग रहे है तुम जल्दी आओं’’
’’जी मैम’’ महक
फोन रखते हुये वार्डन मैम का बुदबुदाना-’’ यह लड़कियाँ भी समझती नहीं--- कहाँ फँस गये ये वार्डन की नौकरी तो ..........लेकिन हम वार्डन का दर्द समझता कौन? कोई होनी अनहोनी हुयी तो ले दे के इल्जाम वार्डन पर आ जायेगा।
महक- ’’म्यूजिक शुरू’’.........
फिर वहीं हल्ला मस्ती अब तक उसका नशा भी कम होने लगा था, उसे माॅ- पापा के नाम से ही डर लगता था।
डरते-डरते आकाश से बोली - जल्दी हास्टल छोड़ दो ।
दृश्य-8
टैªफिक का शोर-’’आकाश गाड़ी जल्दी चलाओं’’
महक-हाँ वार्डन मैम बहुत गुस्सा करेगी---
आज तो पक्का नोटिस है।
आकश-’’अरे यार जो होगा सो होगा अभी तो इन्जाय करों, सुनसान रात में लाॅग ड्रइव का मजा ही कुछ और होता है। थैक्स महक तुमने पार्टी में आकर मेरा छमू लमंत खुशियों से भर दिया।
आकाश का गुनगुना-’’ आने से तेरे आये बाहर तेरे जाने से तेरे जाये बहार.........
आकाश सामने देखो वह बाइक सवार ड्रिंक करके चला रहा है--बचों आकाश गाड़ियों के भीड़ने (एक्सीडेंट की आवाज)
दृश्य-10
वार्डन मैम-’’देखा तुम लोगों के झूठ बोलने का अंजाम’’
सपना रोते हुए-’’साॅरी मैम, प्लीज महक और आकाश को बचा लिजिये।
मैं क्या करूँ.... अब तो भगवान या डाक्टर ही कुछ कर सकते।

सपना- मैम प्लीज इसके पापा से कुछ मत कहना, वह पढ़ाई छुड़ा देंगे। उन्होंने लोन लिया है इसको पढ़ाने को....
 वार्डन मैम-’’ अब कुछ नहीं हो सकता । घर पर खबर तुम सबके जा चुकी है। सब आते ही होगे।
 आकाश और महक पिछले 7 घंटे से बेहोश है पता नहीं इतने भयानक एक्सीडेंट से बच भी पायेगें या नहीं। न जाने तुम सब समझते क्यों नहीं अनुशासन और नियम भलाई के लिए होते। कुछ पल की मस्ती और मजे के लिए अपनी जिंदगी को खतरे में डाल देते। खैर तुमने यह बहुत अच्छा किया कि इन सबको समय से अस्ताल ले ले आयी। यह आगे की सीट पर थे तुम्हारी किस्मत अच्छी थी जो इतने बड़े एक्सीडेंट से बाल बच गयी। बस मामूली चोट आयी है।
महक को होश आ गया-डाक्टर की आवाज अब कैसी हो? वार्डन की आवाज
महक रोते हुये-’’ बहुत कमजोरी लग रही और दर्द भी है साॅरी मैम माफ कर दो।
देर से सही लेकिन तुम्हें अनुशासन व जिन्दगी की कीमत तो पता चली।
मैम आकाश कैसा है?
डाॅक्टर ’’वह भी खतरे से बाहर है’’
वार्डन मैम- जो हुआ उस गलती से सबक लो। मैं तुम्हारें माता-पिता को समझा लूँगी। लेकिन फिर ऐसा मत करना।
नया साल, नयी सीख और नया जीवन मुबारक हो।

डॉ. साधना श्रीवास्तव

Writer sadhanaमेरी मंजिल तो पता है रास्ता कुछ मुश्किल है. अपनी लेखनी से लोगो के दिलो में उत्तर जाना है इस दुनिया और समाज से निराशा उदासी को भुला कर हौसलों के दिये जालना है. न हार हो न जीत का गर्व हम तो एक पथिक है चलते जाना है।

Poem rule of lockdown

 मन डरा डरा सा है हौसला गिरा गिरा सा है क्यों नहीं निभा रहे लोग नियमों को
  क्यों मौत से लोग आंखें निभाने को है तैयार हालात इतने बिगड़ रहे फिर भी नहीं लोग संभल रहे
कोई अर्थव्यवस्था संभाल रहा
तो कोई लॉक डॉन के नियमों की अनदेखी
मन डरा डरा सा है हौसला गिरा गिरा सा है
हम तो सब निभा लेंगे पर क्या सब यह कर ले जाएंगे ए दोस्तों जिंदगी है तो. सब कर लेंगे
थोड़ा तो इस तनाव कम करो थोड़ा तो वक्त की नजाकत को समझो तुम
थोड़ा तो हालातों को जानो
तुम थोड़ा तो हकीकत को पहचानो तुम
काम जो रूके रूके से हैं
सिर्फ तेरे ही नहीं वह सबके हैं जिंदगी होगी
तो सब संभाल लेंगे पर अभी जिंदगी तो बचा लो ऐ मेरे दोस्त लौट डाउन के नियमों को निभा लो
मत करो आपसी बहस मत करो आपसी संघर्ष
कुछ पल बैठो सुकून से कुछ पल तो अपने घर में
बिता लो मन डरा डरा सा है हौसला गिरा गिरा से है के नियमों को निभा लीजिए
डॉ साधना श्रीवास्तव

Education

पुराने अध्यापक को प्रशासन ने बदल दिया था।कक्षा में उदासी का वातावरण था, बच्चे चुप थे। किसी का पढ़ने में मन नहीं लग रहा था। उन्हें लगा नये अध्यापक भी पढ़ाने को नहीं आयेगे। आचनक शोर शांत हो गया।
अध्यापक क्लास में थे उन्होने तेजस्वी आवाज में कहा-‘‘शिक्षा समाज के सामाजिक आर्थिक विकास के लिये बहुत जरूरी है।इस बात का गवाह इतिहास है।शिक्षा का मुख्य लक्ष्य छात्रों को सामाजिक आर्थिक रूप से सक्षम बनाना है।शिक्षकों को अपने दायित्व का निवार्हन करना चाहिये,बिना किसी भेदभाव के स्वार्थरहित हो कर सभी छात्रों को पढ़ाना चाहिये और उनकी ज्ञान की क्षमता को विकसित करना चाहिये। अपने लक्ष्य निर्धारित करे सफलता जरूर मिलेगी।
बच्चे शांति से सुन रहे थे एक ने कहा-‘‘क्या फायदा नौकरी तो मिलनी नहीं मेरे भाई साहब तो बहुत पढ़े लिखे है लेकिन बेरोजगार है।‘‘
दूसरे ने कहा -‘‘बिल्कुल सही नौकरी तो परिचय वालो और पैसों वालो को मिलती है।‘‘
अध्यापक -‘‘आज के समाज को विकास लिये कपड़े,घर,कार या अन्य सुख सुविधाओं से ज्यादा आवश्यकता शि़क्षा की आवश्यकता है,इससे आत्मविश्वास आता है।अगर सभी अपना लक्ष्य लेकर चलें जिन्दगी की चुनौतियों से ना डर नहीं बल्कि अपनी आलोचना सुनते हुये,कठिन परिश्रम से आगे बढ़ते रहे तो सफलता अवश्य मिलेगी है।‘‘
उनके अच्छे से पढ़ाने से क्लास का रिजल्ट अच्छा आया । लेकिन अगले साल उनके स्थान पर किसी और को नौकरी मिल गयी। कुछ बच्चे उदास थे तो कुछ उपहास से देख रहे थे ।
परन्तु अध्यापक निराश नहीं था क्योकि उसे यकीन था कि जीवन भर सीखना ,प्रेरणादायक सपने और आंतरिक आत्मविश्वास शिक्षा से ही आता है जो आपके और आपके परिवार के सपनों को पूरा कर सकते है। अपनी शिक्षा और डिग्रीयों के साथ नये सफर को वह एक बार फिर तैयार था।
डॉ साधना श्रीवास्तव

Goddess of time

बात उन दिनों की है जब मैं हाई स्कूल में थी, उस साल के जो एग्जाम सभी पेपर बहुत अच्छे गये और आखिरी पेपर सामाजिक विषय II (दूसरा ) था।
सामाजिक विषय का प्रथम प्रश्नपत्र बहुत अच्छा गया था हम थोड़े से लापरवाह हो गये उस रात हम दो बजे ही सो गये जबकि रोज सुबह 4 बजे तक पढ़ते थे।
मेरी लापरवाही का यह नतीजा हुआ कि हम देर तक सोते रह गये आँख खुली, घड़ी देखी 7 बज रहे थे, जबकि 7 बजे एग्जाम शुरू हो जाता था।
हम घबड़ा गये, जल्दी-जल्दी बिना ब्रश किये ही बस ड्रेस पहन कर स्कूल भागे।
वहाँ रोल न0 के हिसाब से रोज रूम खोजना होता था, हम जल्दी-जल्दी अपना रूम खोजने लगे और जब रूम मिला तब तक 8.15 हो चुका था। टीचर ने मुझे बहुत डॉटा कहा कि अब क्या एग्जाम दोगी, जाओ घर जाकर मस्ती से सो जाओे,------
हम लगातार रोये जा रहे थे।
टीचर के हाथ-पैर जोड़कर कापी पेपर माँगा, अब सिर्फ डेढ़ घंटा बचा था, कुछ समझ नहीं आ रहा था, बस हम लागातार रोये जा रहे थे।
क्या लिखें ? क्या करें ?
जितना याद किया था, वो सब भी भुलने लगे कुछ याद ही नहीं आ रहा था क्या लिखे।
मेरी कापी के पन्ने मेरे जवाबो से नहीं आँसूओं से भीग रहे थे।
अचानक मेरे कानों में किसी के हँसी की आवाज आयी, मैंने आस-पास नजर उठाकर देखा कोई नहीं था, मैं अब लिखने लगी कि फिर वह खनकदार हँसी की आवाज मेरे कानों में पड़ी थी।
नजर घुमा कर देखा एक स्त्री हवा में तैर रही थी, जिसके बाल काफी लम्बे, घने, काले व खुले थे।
उसने बिलकुल सफेद रंग का लहंगा चुनरी पहना हुआ था वह हवा मेंं तैर रही थी।
उसका शांत चेहरा देखकर मुझे डर बिल्कुल नहीं लग रहा था।
वो मुझे देखकर मुस्कुरा रही थी, उसकी हँसी अब थम चुकी थी।
मैं एकटक उस स्त्री के चेहरे की जादुई कशिश को देखे जा रही थी।
उसने मुस्कुरा कर कहा-’’मैं समय की देवी हूँ, समय मेरे वश में है, जो इन्सान समय की परवाह नहीं करता, वो कितनी भी मेहनत कर ले पर वह सफल नहीं होता, लगातार कोशिशें, मेहनत सब तब ही काम करता जब लोग मेरी यानि समय की देवी की परवाह करते ..... इसी के साथ वो हँसती हुयी हवा में अदृश्य हो गयी।‘‘
और मेरी आँख खुल गयी, घड़ी देखा सुबह के पाँच बज रहे थे।
वो सब एक सपना था, मुझे देर नहीं हुयी थी।
देर होती भी कैसे मुझे जगाने समय की देवी खुद आयी थी । तब से हमने गाँठ बाँध ली।
हमेशा समय की कद्र करना सीख गयी। मुझे पापा और समय की देवी की सीख हमेशा याद रही, जिसके वजह से मुझे पढ़ाई में कभी दिक्कत नहीं आयी।

Way and distinction

 पथ और मंजिल

 पथिक तुम भटके हो  पथ से
या कोई  भ्रम तुमको है
बात तो सही है पथ भी सही है
फिर क्यों मंजिल दूर है
उलझे हो मन के झंझावातों में
उलझे हो या पथ के कांटो ने रोका है
जब मंजिल है इस पर स्थिर
तो तुम क्यों अस्थिर चकाचौंध है
जिसमें खो गए हो
इससे निकले की रोशनी की किरण
सवाल तो बहुत है जवाब सिर्फ तुम हो
अपनी उलझनों से निकलो
आगे बढ़ो कोई भी हो मंजिल तो पता है
फिर कैसे कोई चक्रव्यू क्यों रोकता है
आगे बढ़ो आगे बढ़ते रहो
आगे बढ़ते रहने से हिम्मत मिलेगी
पथिक तुम्हारा होगा मार्ग प्रशस्त 
यहीं पर तुम्हें देगा मंजिल का रास्ता
 पथ और मंजिल का है गहरा रिश्ता
यह रिश्ता तोड़ना ना मंजिल के पाने से पहले 
अपने पथ को छोड़ना ना
तुम्हारी मंजिल  है तुम्हारी
बस यही है और मंजिल की कहानी
डॉ साधना श्रीवास्तव

The girl

 वह लड़की
बहुत छोटी सी लड़की
जिसकी आंखों में नहीं हाथों में था पानी
हर राही से पूछ रही थी वह स्टेशन पर पानी बेच रही थी
थी नन्ही सी खुद भी जो प्यासी
फिर भी कर्म पथ की अनुरागी
कड़ी तपती धूप बड़ी थी
फिर भी जीवन से हार न मानी
उसके नन्हे बनने पर तो जलते थे
पर तो जलते थे पर हाथ तो सब की प्यास मिटाते
वही बगल में एक भिखारी मांगे भी
जिसको नन्ही लड़की दे गई थी सीख
लगन अगर सच्ची हो तो कुछ भी कर सकती है नन्ही सी बच्ची बूंद बूंद सब की प्यास मिटा दें कितनी मेहनत वह करती थी
हाल देख कर जग को सारे मेरी आंखो में आ गया था पानी
वह नन्ही सी लड़की पानी को बेच रही थी