Sunday, October 22, 2017

स्किल इंडिया मिशन

स्किल इंडिया मिशन - भारतीय कौशल को सवाॅरने और सहेजने की योजना
युवा किसी भी देश की शक्ति की आधारशिला होते है,भारत के माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने भारतीयों के कौशल विकास और रोजगाार की आवश्यकता को ध्यान में रख कर स्किल इंडिया योजना शुभांरम्भ 15 जुलाई 2015 को किया ।
जिसका लक्ष्य 2022 तक 40 करोड़ लोगों को उनके कौशल और क्षमता के अनुरूप रोजगार के साथ उद्यमिता विकास करना  है।
इस योजना में सरकार ने 200 से अधिक कौशलों को शामिल किया है जिसमें हस्तकला, चमड़ा, टेक्सटाइल, बुनकर आदि व्यावसायिक प्रशिक्षण को बढ़ावा देना।
स्किल इंडिया मिशन के तहत प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना का लक्ष्य महिलाओं की उन्नति, विकास और सशक्तिकरण से जोड़ कर भी देखा जा सकता है तो वही इसे स्थानीय आत्मनिर्भरता और क्षमता निर्माण की एक सार्थक पहल माना जा सकता है।
सम्मानजनक जीवन जीना और क्षमता के अनुरूप रोजगार हर किसी का सपना होता है।
विकास और प्रतिस्पद्र्धा की दौर में भारत अग्रणी निभा रहा है, लेकिन फिर भी बेरोजगाारी एक विकराल चुनौती के रूप में विकास की गति को धीमा कर रही है।
स्किल इंडिया योजना का लक्ष्य-
सरकार की अभिनव पहल के तहत मुख्य निर्धारित लक्ष्य अग्रलिखित है-
1-मोदी सरकार की योजनाओं के दूरगामी रणनीति के तहत इस स्किल इंडिया का लक्ष्य देश की जनता के कौशल को देखकर पहचना, निखरना और उन्हें उनके कौशल के अनुरूप रोजगार उपलब्ध कराना है।
2- इसके साथ ही एक और प्रमुख लक्ष्य है इस योजना का कि लघु और कुटीर उद्योगों को भी नया कलेवर मिले । 
3-जनता में योग्य कौशल को संरक्षित और विकसित करना और उचित कौशल देकर रोजगार की सम्भावनाओं को विस्तार देना है।
स्किल इंडिया योजना के कारगार कदम-
अब प्रश्न यह उठता है कि ऐसे कौन-कौन से कदम है जिनसे कौशल विकसित किया जा सकता है।
योजना सरकार ने शुरू की है परन्तु योजना की सफलता के लिए आवश्यक है कि कौशल विकास के इस अभियान में सभी अपनी क्षमता अनुरूप योगदान करें । सरकार ने जो लक्ष्य निर्धारित किया कि जनता को कौशल प्रशिक्षण देना ताकि वह स्वयं को विकसित करके अच्छे रोजगार अवसर प्राप्त करें बल्कि स्वयं भी उद्यमिता विकास करे और दूसरों के लिए भी रोजगाार के अवसर उपलब्ध कराये ना सिर्फ नौकरी पाने की होड़ में अपने कौशल को समाप्त हो जाने दे।
विस्तृत रूप से इस योजना की सफलता के लिए जिम्मा भले सरकार ने लिया हो परन्तु इसके लिए एन0जी0ओ0 और प्रशिक्षण संस्थानों की भूमिका अहम हो जाती है।
संक्षेप में कहे तो यह योजना कुछ विशेष चरणों मे कार्य कर रही है-
1-जनता के कौशल और क्षमता को पहचनना ।
2- जनता के कौशल को पहचान कर प्रमाणन इेना अर्थात प्रमाणित करना ।
3- जनता के कौशल के अनुरूप प्रशिक्षण योजना बनाना और उन्हें प्रशिक्षत करना ।
4- जनता को स्वरोजगार और उद्यमिता को पे्ररित करना ।
स्किल इंडिया योजना का सकरात्मक पक्ष-
1- इसका लाभ वह भी उठा सकते जो या तो शिक्षित नहीं है या किसी कारण से अपनी शिक्षा पूरी नहीं कर पाये।
2- भारत के स्थानीय शिल्प, कला और लघु उद्योगों को भी नयी सम्भावनायें मिलेगी।
3-इस योजना के तहत महिलाओं को कौशल विकास के लिए विशेष रूप से  प्रेरित किया जायेगा उन्हें अलग समूहों में प्रशिक्षण प्राप्त करने की सुविधा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
4- डिजिटल इंडिया योजना ने भारत के गाॅव-गाॅव तक इंटरनेट को पहुचाने की योजना है तो इस तरह से जाये तो आॅनलाइन और इंटरनेट के प्रयोग से भारतीय हुनर को विश्व स्तर पर मंच दिया जा सकता है।
5-भारतीय शिल्प, टेक्साटाइल, रेशम, कालीन, चमड़ा, जूट,ज्वैलरी और ऐसे असंख्य हुनर और कौशल को विशेषरूप से प्रोत्साहित किया जा सकता है।
6- भारतीय युवा नौकरी के पीछे भाग रहा है। गाॅवों से शहरों की ओर भाग रहा है कौशल विकास से वह अपने गाॅवों में ही स्वरोजगार की सम्भावनायें तलाश लेगा।
7- विश्व स्तर पर भारतीय लघु उद्योगों को भी पहचान मिल सकेगी क्योकि भारतीय युवाओं को अपनें कौशल को निखारने का अवसर मिलेगा तो वह भविष्य में अपनी कला और हुनर को  विश्व स्तर पर मंच दे सकते है।
स्किल इंडिया योजना की चुनौतियाॅ-
सबसे बड़ी चुनौता तो मानसिकता में बदलाव में है वर्तमान में युवा चकाचैध के पीछे भाग रहा है और समाज भी प्रतिष्ठा और सम्मान नौकरी पेशा और ज्यादा पैसे वालों को देता तो ऐसे में स्वरोजगार की प्रारम्भिक चुनौतियों को सहने का मनोबल बहुत कम लोगों में होता है।
अभिभावक और छात्र सिर्फ डिग्री के चाह में है वह कौशल निर्माण या गुणवत्ता की ओर ध्यान भी नहीे देते है।
स्थानीय प्रशिक्षण के साथ शिक्षण संस्थानों को भी इस दिशा में सकरात्मक कदम उठाने होगे।
भारत में जब भी कोई योजना बनती तो विरोधी समूह योजना का सकरात्मक पक्ष ना देख कर सिर्फ चुनौतियों और कमियों में जुट जाता है तो ऐसे में अच्छी योजना भी असफल हो जाती है। ग्रामीण स्तर तक सुविधाओं, प्रौद्योगिकी और प्रशिक्षण संस्थानों की पहॅुच।
असंगठित क्षेत्रों को एक मंच देना अर्थात पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पसलन, खादी और ग्रामोउद्योग, शिल्प जैसे क्षेत्रों कोसंगठित कर पाना एक चुनौतीपूर्ण कार्य है।
स्किल इंडिया योजना का मूल्याकंन -
प्रधानमंत्री मोदी ने हाल में ही स्टार्ट अप इंडिया और स्टैंड अप इंडिया का नारा दिया है।
प्राथमिकताए बदली नयी सम्भावानाएं बनी इनोवेशन के आइडिया आये बहुत से इंडियन इनवेस्टरर्स आगे आये । स्किल इंडिया का मकसद नये उद्यमिता को प्रोत्साहन देना और छोटे उद्योगों को बढ़ावा देना है साथ भविष्य में विश्व अर्थव्यवस्था में भारत का परचम लहराना है। हमे चुनौतियों से डरना नहीं है बल्कि समाधान खोजना है ।
पराम्परिक हुनर को नया रूप देना और प्रगतिशील भारत का नवनिर्माण करना है। क्षमताओ को बढ़ाना और नये अवसरों को खोजना है। ना कि हारना या डर कर बैठना है बल्कि आर्थिक विकास के क्षेत्र में नयी पहल का स्वागत कर ऐसा महौल बनाना है कि एक फिर भारतीय विश्व पटल पर अपने कौशल के बल पर कह सके -‘‘ सारे जहाॅ से अच्छा हिन्दुस्तान हमारा‘‘
 

डाॅ साधना श्रीवास्तव
उ0प्र0राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय, इलाहाबाद 
उ0प्र0

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